दोस्तों जैसे की आप जानते ही है की सर्दियों
का मौसम आने वाला है और इन सर्दियों के मौसम मे धूप किसको अच्छी नहीं लगती सर्दियों
के मौसम में गुनगुनी धूप लेने का अपना ही मजा है। यह न केवल आपके ठंडे मौसम में
गर्माहट देती है बल्कि कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाती है।
सर्दियों में गुनगुनी धूप लेने के यह 5
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ
1 सर्दी के मौसम में धूप लेने का सबसे
बड़ा फायदा यह है, कि
यह ठंडे-ठंडे मौसम में आपके शरीर को गर्माहट देती है और आपको सर्दी की अकड़न से
बचाती है। धूप लेने के बाद इन दिनों में आपकी कार्यक्षमता में इजाफा होता है।
2
धूप में बैठने से आपको भरपूर मात्रा में विटामिन डी मिलता है, जो
आपकी हड्डियों के विकास के लिए जरूरी है। इसके आलावा जोड़ों के दर्द और ठंड के
कारण होने वाले शारीरिक दर्द में भी आराम मिलता है।
3 नींद न आने की समस्या होने पर
प्रतिदिन कुछ देर धूप में बैठना बेहद फायदेमंद होता है। इससे आपका दिमाग भी तनाव
मुक्त होता है और रात को नींद भी अच्छी आती है। नींद के लिए यह रामबाण उपाय
है।
4 शरीर के किसी हिस्से पर होने वाले
फंगल इंफेक्शन को ठीक करने के लिए भी धूप लेना काफी फायदेमंद है। नमी के कारण होने
वाले कीटाणुओं के संक्रमण को रोकने में धूप कारगर होती है।
5 धूप में बैठना शरीर खून जमने की
प्रक्रिया को रोकता है और रक्तसंचार को बेहतर करता है। साथ ही डाइबिटीज और हृदय
संबंधी रोगों में भी धूप लेना लाभकारी होता है।
कि आखिर जिस Refined तेल से आप अपनी और अपने छोटे बच्चों की मालिश
नहीं कर सकते , जिस Refined को आप बालों मे नहीं लगा सकते , आखिर उस हानिकारक Refined तेल को कैसे खा लेते हैं ?
2 मिनट समय देकर Refined तेल की पुरी कहानी जरूर पढ़ें ।
मित्रो आज से 50 साल पहले तो कोई रिफाइंड तेल के बारे में जानता नहीं था, ये पिछले 30-35 वर्षों से हमारे देश में आया है | कुछ विदेशी कंपनियों और भारतीय कंपनियाँ इस धंधे
में लगी हुई हैं | शुरुवात
मे इन्होने चक्कर चलाया और टेलीविजन के माध्यम से जम कर प्रचार किया लेकिन लोगों
ने इनकी बात को माना नहीं तब इन्होने डाक्टरों के माध्यम से कहलवाना शुरू किया | डाक्टरों ने अपने प्रेस्क्रिप्सन में रिफाइन तेल
लिखना शुरू किया कि तेल खाना तो सफोला का खाना या सनफ्लावर का खाना, ये नहीं कहते कि तेल, सरसों का खाओ या मूंगफली का खाओ, अब क्यों, आप सब समझदार हैं समझ सकते हैं |
रिफाइंड तेल बनता कैसे हैं ?
पहले ये जान लीजिये ये रिफाइंड तेल बनता कैसे हैं ? मैंने देखा है और आप भी कभी देख लें तो बात समझ
जायेंगे | किसी भी तेल को रिफाइंड करने में 6 से 7 केमिकल का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइंड करने में ये संख्या 12 -13 हो जाती
है | ये सब केमिकल मनुष्य
के द्वारा बनाये हुए हैं प्रयोगशाला में, भगवान का बनाया हुआ एक भी केमिकल इस्तेमाल नहीं होता, भगवान का बनाया मतलब प्रकृति का दिया हुआ जिसे हम
ओरगेनिक कहते हैं |
तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल
किये जाते हैं सब अजैव (Inorganic) हैं और अजैव (Inorganic) केमिकल ही दुनिया
में जहर बनाते हैं और उनका संगठन (combination) जहर के तरफ ही ले जाता है | इसलिए रिफाइंड तेल, डबल रिफाइंड तेल गलती से भी न खाएं |
फिर आप कोन सा तेल इस्तेमाल करें
फिर आप कहेंगे कि, क्या खाएं ? तो आप
शुद्ध तेल खाइए, सरसों
का, मूंगफली का, तीसी का, या नारियल का | अब आप
कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता
है | हमलोगों ने जब शुद्ध
तेल पर काम किया या एक तरह से कहे कि रिसर्च किया तो हमें पता चला कि तेल का
चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है | तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकाला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल
ही नहीं रहा, फिर हमने देखा कि
तेल में जो बास आ रही है वो उसका प्रोटीन कंटेंट है, शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है, दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है, दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों
में ही है, तो तेलों में जो बास
आप पाते हैं वो उसका जैविक खाद (Organic Content) है
प्रोटीन के लिए | 4 -5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे उसका प्रोटीन
वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका Fatty Acid गायब | अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं
पानी है, जहर मिला हुआ पानी |
रिफाइंडतेलकोखानेसे क्या
नुक्सान हो सकता है
रिफाइंड तेल के खाने से कई प्रकार की
बीमारियाँ होती हैं, जैसे की घुटने
दुखना, कमर दुखना, हड्डियों में दर्द, ये तो छोटी बीमारियाँ हैं,
सबसे खतरनाक बीमारी है, हृदयघात
(Heart Attack), पैरालिसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना, आदि, आदि | जिन-जिन घरों में पुरे मनोयोग से रिफाइन तेल खाया
जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे, अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइंड तेल इस्तेमाल हो रहा है
उन्ही के यहाँ Heart Blockage और Heart Attack की समस्याएं हो रही
है |
सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट
जब हमने सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया, सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो AIIMS के भी कई डोक्टरों की रूचि इसमें पैदा हुई तो
उन्होंने भी इसपर काम किया और उन डोक्टरों ने जो कुछ भी बताया उसको मैं एक लाइन
में बताता हूँ क्योंकि वो रिपोर्ट काफी मोटी है और सब का जिक्र करना मुश्किल है, उन्होंने कहा “तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल
रिफाइन में कुछ भी नहीं रहता, वो छूँछ
बच जाता है, और उसी को हम खा रहे
हैं
तो तेल के माध्यम से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी
चाहिए वो मिल नहीं रहा है |
तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा ?
मैं बता दूँ पहले आप ये जान लीजिये चिकनाहट भी दो तरह की होती है
अच्छी चिकनाहट बुरी चिकनाहट । आपके चेहरे पर जो चमक है ,आपके घुटने हिलते डुलते है , आपके हाथ की उँगलियाँ मुड़ती है खुलती है ये सब
अच्छी चिकनाहट के कारण है ,
कभी आप कोलोस्ट्रोल चैक करवाने जाएँ तो रिपोर्ट
मे आप देखेंगे और डाक्टर आपको कहेगा आपका HDL (High Density Lipoprotein) बढ़ना चाहिए और LDL (LOW Density Lipoprotein) कम होना
चाहिए । साधारण भाषा मे बोले तो HDL
अर्थात अच्छी वाली चिकनाहट और LDL अर्थात गंदी वाली चिकनाहट । ( जो heart मे blockage
करती है )
जो कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है HDL (High Density Lipoprotein), ये तेलों
से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो
ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब | तो आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका HDL अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे |
क्या है पामोलिन तेल हम सब क्यों खा रहें है पामोलिन
तेल
अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल
बिक रहा है | मलेशिया नामक एक
छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में। वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक-दो टन नहीं, लाखो-करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट कर के भारत
के बाजार में बेचा जा रहा है |
7 -8 वर्ष
पहले भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दुसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा
सकता था लेकिन GATT समझौता
और WTO के दबाव में अब
कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिला के बेचा जा सकता है | भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद
तेल ले आइये, रिफाइन तेल और डबल
रिफाइन तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है वो पामोलिन तेल है |
और जो पाम तेल खायेगा, मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने को तैयार हूँ कि
वो ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों से मरेगा | क्योंकि पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम
तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है और ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी खत्म नहीं होते हैं, किसी भी तापमान पर खत्म नहीं होते और ट्रांस फैट जब शरीर में खत्म नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी
हृदयघात होता है, ब्रेन
हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड
प्रेशर की शिकायत होती है |
तो मित्रो अच्छी चिकनाहट) (HDL ) लेने के लिए हमेशा शुद्ध तेल खाएं पहाड़ो
मे रहने वाले तिल का तेल सबसे बढ़िया , मैदानी
क्षेत्र मे रहने वालों के लिए सरसों का तेल सबसे बढ़िया , और समुन्द्र के पास रहने वालों के लिए नारियल का
तेल सबसे बढ़िया । इसके अतिरिक्त मूँगफली आदि का तेल भी प्रयोग कर सकते है ।
गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन में
नएरिश्ते की शुरूआत का सबसे अद्भुत सुखद
लेकिन नाजुक समय होता है। एक दिल कीधड़कन के भीतर एक दिल की धड़कन, एक
जीवन के भीतर एक जीवन है, एक नयारिश्ता बनता है, इसलिये प्रेग्नेंट महिलाओं की सेहत का खास ख्याल रखा जाता है। ऐसे में
वास्तु कीबताई गई कुछ
आसान वस्तु इस काम में मददगार साबित हो सकती है। वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर कुछ खास चीजें प्रेग्नेंट महिला का रूम में
रखी जाएतो महिला और बच्चे
दोनों की सेहत ठीक रहती है, साथ ही बच्चा गुणवान बनताहै।
आइये जाने क्या
है वो चीजे
मोर पंख
मोर पंख भगवान कृष्ण से सम्बंधित है।
ऐसे में घर के मंदिर या गर्भवती महिलाके कमरे में मोर पंख रखना मां और बच्चे दोनों के लिए अच्छा माना जाता
है।
पीले चावल
पीले चावल शुभ संकेत बताते हैं। ऐसे
में गर्भवती महिला के कमरे में पीलेचावल रखने से मां और बच्चे पर किसी तरह की नेगेटिविटी का असर नहीं
होता है।
भगवान कृष्ण और देवी यशोदा की तस्वीर
गर्भवती महिला के कमरे में भगवान कृष्ण
और देवी यशोदा की तस्वीर लगानीचाहिए।
तस्वीर को इस तरह लगाएं कि महिला को सुबह उठते ही तस्वीर के दर्शनहो।
गुलाबी रंग की तस्वीर या शो-पीस
गुलाबी रंग ख़ुशी और आनंद का प्रतीक
माना जाता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिलाके कमरे में इस रंग की कोई बड़ी तस्वीर लगाना या शो-पीस रखना अच्छा
होताहै।
वास्तु देव की मूर्ति या तस्वीर
कई बार कमरे का गलत वास्तु भी
मां-बच्चे के लिए परेशानियों का कारण बन सकताहै। कमरे में वास्तु देव की मूर्ति या तस्वीर हो तो इसका असर नहीं
पड़ता।
हंसते-मुस्कुराते बच्चों की तस्वीर
गर्भवती महिला के कमरे में
हंसते-मुस्कुराते बच्चों की तस्वीर लगाना बेहदशुभ माना जाता है। ऐसा करने से बच्चा शांत और हंसमुख स्वभाव का होता
है।
तांबे की कोई वस्तु
तांबा बुरी नज़र और नेगेटिविटी को दूर
कर पॉजिटिविटी बढ़ाता है। तांबे कीवस्तु गर्भवती महिला के कमरे में रखने से वहां पॉज़िटिव एनर्जी बनी
रहती है।
सफ़ेद रंग की तस्वीर या शो-पीस
सफ़ेद रंग शांति और अच्छी हेल्थ का
प्रतीक माना जाता है। इस रंग की कोईतस्वीर या शो-पीस कमरें में रखने से मां और बच्चे की हेल्थ अच्छी
रहती है।
स्त्री हो या
पुरुष खानपान और जीवन शैली का हमारे शरीर पर बहुतअधिक प्रभाव पड़ता है। जब भी कोई कमजोरी
का जिक्र करता है, तब
आपने अक्सरबड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि खानपान ठीक करो, कमजोरी अपने आप दूरहो
जाएगी स्वस्थ शरीर के लिए सही खानपान बेहद जरूरी है, लेकिन कुछ ऐसेभोज्य पदार्थ भी होते हैं जिनका मूड पर
विपरीत असर पड़ता है। इसीलिए ऐसेभोज्य पदार्थों के बारे में जानना
महत्वपूर्ण हो जाता है, जो
आपकीकामोत्तेजना
को प्राकृतिक रूप से नष्ट करते हैं। ये पदार्थ पुरुषों कोकमजोर बना सकते हैं।
इसलिए खाने की ऐसी चीजों को पहचान कर अपनी खाने कीलिस्ट से बाहर कर दें, जो आपकी ताकत को कम कर सकती है।
आइए जानते हैं ऐसी ही
चीजों के बारे में
शराब
शराब से ऐसी रासायनिक
क्रिया आरम्भ हो जाती है जोटेस्टोस्ट्रोन के उत्पादन को कम करती
है। शराब पीने के बाद आप अच्छा महसूसकर सकते हैं, लेकिन इससे नींद आती है और आप अपने
वातावरण के प्रति कमसंवेदनशील हो जाते हैं। ऐसा होना
पुरुषों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
पैकिंग फूड
वे पुरुष जो बहुत अधिक पैकिंग फूड का सेवन करते हैं,
उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इनकी कोटिंग में कुछ खास किस्म
का मेटल इस्तेमाल किया जाता है, जो पुरुषों की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना
जा सकता है।
जंक फूड
जंकफूड की हाइड्रोजन युक्त वसा टेस्टोस्ट्रोन स्तर को
कम करती है और पुरुषों में निम्न गुणवत्ता वाले और असमान्य शुक्राणु
उत्पन्न करती है। कॉर्न फ्लेक्स
कॉर्न फ्लेक्स पुरुषों के लिए नुकसानदायक होता है। इसके अधिक सेवन से सेक्स लाइफ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
सोयाबीन
सोयाबीन में फोटो ईस्ट्रोजेन होते हैं, जो पुरूष सेक्स
हार्मोन से प्रतिस्पर्धा करते हैं। इससे पुरूषों में प्रजनन, स्तन विकास और
बालों के गिरने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
चिप्स
चिप्स पुराने तेल मे तले होने के साथ-साथ उच्च तापमान पर
निर्मित किए जाते हैं। इसलिए इन्हें खाना सेहतमंद नहीं होता है। चिप्स आपकी
कामोत्तेजना के साथ-साथ आप के शरीर की कोशिकाओं और उतकों को भी नुकसान
पहुंचाती है।
मिंट
मिंट भले ही सांस की बदबू दूर करने का सबसे बेहतरीन उपाय
है, लेकिन काम वासना पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मिंट में मेंथोल
होता है, जिससे कामोत्तेजना कम होती है।
रेड मीट का सेवन
वैसे तो रेड मीट प्रोटीन बहुत अधिक मात्रा में
पाया जाता है लेकिन रेड मीट का सेवन करने से न केवल पुरुष्ा बल्कि महिलाओं
के सेक्सुअल स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। यह मेल हार्मोन को कम कर
देता है।
कॉफी
ज्यादा कॉफी पीना पुरुषों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इसके अधिक सेवन से शरीर में तनाव उत्पन्न करने वाला हॉर्मोन कॉर्टिसॉल बनने
लगता है। कैफीन की अधिक मात्रा से हार्मोन असन्तुलन और तनाव हो सकता है।
सोडा
सोडा और सुगंधित पेय पदार्थों के सेवन से वजन और मूड में
भारी उतार-चढ़ाव हो सकता है। इन पेय पदार्थों से मोटापा, दांतों में छेद,
डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही, पुरुषों की सेक्स लाइफ पर भी
इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ता है।
चीज
अधिक वसा वाले पुरुषों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। चीज में
बहुत अधिक फैट होता है। इन उत्पादों के ज्यादा सेवन से शरीर में जहरीले
पदार्थ बनते हैं। साथ ही, ईस्ट्रोजेन, प्रोजेस्ट्रोन और टेस्टोस्ट्रोन जैसे
हार्मोन्स के निर्माण में भी रूकावट आती है।
खराब क्वालिटी तेल
खराब क्वालिटी के तेल में बने पदार्थ फ्री रैडिकल उत्पन्न करते हैं, जो कि पुरुषों के शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं।
भोजन मानव को निरोगी भी रखता है और रोगी भी रखता है इसीलिए हिन्दू धर्म में
योग और आयुर्वेद के नियमों पर चलने के धार्मिक नियम बनाए गए हैं। स्वास्थ्य
को बेहतर बनाने के लिए कई बातों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।कब क्या चीज दिन में किस समय खानी
चाहिए, इसका विशेष ख्याल रखना चाहिए। कुछखाद्य सामग्रियों में एसिड की मात्रा
ज्यादा होती है, ऐसे में उन्हे खालीपेट खाना या पीना आपको नुकसान पहुंचा
सकता है।
1- सुबह उठ कर कैसा पानी पीना चाहिएहल्का गर्म2--पानी पीने का क्या तरीका होता हैसिप सिप करके वनीचे बैठ कर
3 -खाना कितनी बार चबाना चाहिए 32 बार4-- पेट भर कर खाना कब खाना चाहिए सुबह5--सुबह का खाना कब तक खा लेना चाहिए सूरज निकलने के ढाई घण्टे तक6--सुबह खाने के साथ क्या पीना चाहिएजूस7 -दोपहर को खाने के साथ क्या पीना चाहिए लस्सी/छाछ8 -रात को खाने के साथ क्या पीना चाहिएदूध9 -खट्टे फल किस समय नही खाने चाहिएरात को10 -लस्सी खाने के साथ कब पीनि चाहिएदोपहर को11 सुबह -खाने के साथ जूस कब लिया जा सकता है।
12 रात को-खाने के साथ दूध कब ले सकते है 13 -आईसक्रीम कब कहानी चाहिएकभी नही14- फ्रीज़ से निकाली हुई चीज कितनी देर बाद कहानी चाहिए 1 घण्टे बाद15-क्या कोल्ड ड्रिंक पीना चाहिएनही16 -बना हुआ खाना कितनी देर बाद तक खा लेना चाहिए 40 मिनट
17--रात को कितना खाना खाना चाहिएन के बराबर18 -रात का खाना किस समय कर लेना चाहिए सूरज छिपने से पहले19 -पानी खाना खाने से कितने समय पहले पी सकते हैं 48 मिनट20-क्या रात को लस्सी पी सकते हैंनही21 -सुबह खाने के बाद क्या करना चाहिए काम22 -दोपहर को खाना खाने के बाद क्या करना चाहिएआराम23 -रात को खाना खाने के बाद क्या करना चाहिए 500 कदम चलना चाहिए24 -खाना खाने के बाद हमेशा क्या करना चाहिएवज्र आसन25 -खाना खाने के बाद वज्रासन कितनी देर करना चाहिए 5-10मिनट26 -सुबह उठ कर आखों मे क्या डालना चाहिएमुंह की लार27 -रात को किस समय तक सो जाना चाहिए 9-10बजे तक28- तीन जहर के नाम बताओचीनी मैदा सफेद नमक29 -दोपहर को सब्जी मे क्या डाल कर खाना चाहिएअजवायन30 -क्या रात को सलाद खानी चाहिएनहीं31 -खाना हमेशा कैसे खाना चाहिएनीचे बैठकर व खूब
चबाकर32 -क्या विदेशी समान खरीदना चाहिएकभी नही33 -चाय कब पीनी चाहिएकभी नहीं34- दूध मे क्या डाल कर पीना चाहिएहल्दी35--दूध में हल्दी डालकर क्यों पीनी चाहिए।कैंसर ना हो इसलिए36 -कौन सी चिकित्सा पद्धति ठीक हैआयुर्वेद37 -सोने के बर्तन का पानी कब पीना चाहिएअक्टूबर से मार्च
(सर्दियों मे)38--ताम्बे के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए जून से सितम्बर(वर्षा ऋतु)39 -मिट्टी के घड़े का पानी कब पीना चाहिएउमार्च से जून
(गर्मियों में)40 -सुबह का पानी कितना पीना चाहिएकम से कम 2-3गिलास41 -सुबह कब उठना चाहिएसूरज निकलने से डेढ़
घण्टा पहले।